NEWS OF THE DAY – .22.07.2019

** NEWS OF THE DAY – .22.07.2019 **
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करेंट अफेयर्स :-

जर्मनी की निवर्तमान रक्षा मंत्री उर्सुला वॉन डेर लेयेन को यूरोपीय यूनियन की कार्यकारी इकाई यूरोपीय कमीशन का अध्यक्ष चुना गया है। वह इस पद को संभालने वाली पहली महिला हैं। क्रिश्चियन डेमोक्रेट यूनियन की सदस्य उर्सुला, ज्याँ-क्लाउड जुनकर की जगह लेंगी। उन्हें जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल का विश्वस्त सहयोगी माना जाता है और बीते 50 साल में यह पहला अवसर है जब जर्मनी के किसी व्यक्ति को यूरोपीय कमीशन का अध्यक्ष चुना गया है। आपको बता दें कि यूरोपीय संघ का एक महत्त्वपूर्ण अंग है यूरोपीय कमीशन। इसके अलावा यूरोपीय संसद, यूरोपीय संघ परिषद तथा यूरोपीय सेंट्रल बैंक भी इसके महत्त्वपूर्ण अंग हैं। यूरोपीय संघ मुख्यतः यूरोप में स्थित 28 देशों का एक आर्थिक और राजनीतिक मंच है, जिनकी प्रशासकीय साझेदारी है तथा साझी मुद्रा (यूरो) के अलावा साझी विदेश, सुरक्षा, न्याय नीति भी है।

हाल ही में भारत के केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग तथा रेल मंत्री पीयूष गोयल ने लंदन में भारत-ब्रिटेन संयुक्त आर्थिक व्यापार समिति (जेटको) की बैठक में हिस्सा लिया। दोनों देश अनुसंधान और सेवा क्षेत्र में भारत-ब्रिटेन साझेदारी की नीति का आधार ‘ब्रिटेन में डिजाइनिंग–भारत में निर्मित’ को मानते हैं। इससे व्यापार, वाणिज्य और सेवा क्षेत्र में दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को बढ़ावा मिलेगा। जेटको प्लेटफॉर्म का उद्देश्य दोनों देशों को आपसी सहयोग के क्षेत्रों की पहचान करने में सहायता करना तथा आपसी व्यापार से संबंधित मुद्दों का सरल समाधान तलाशना है।

इसके अलावा भारत और ब्रिटेन ने खाद्य तथा पेय पदार्थों, स्वास्थ्य सेवा और डेटा सेवाओं के व्‍यापार में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिये तीन नए द्विपक्षीय कार्य समूह गठित करने पर सहमति जताई। विदित हो कि भारत-ब्रिटेन के व्यापार और आर्थिक संबंधों की समीक्षा जेटको द्वारा प्रतिवर्ष वाणिज्य और उद्योग मंत्रियों के स्तर पर की जाती है।

जेटको की अब तक 12 बैठकें हो चुकी हैं और अंतिम बैठक लंदन में 11 जून, 2018 को आयोजित की गई थी। द्विपक्षीय आर्थिक व्यापार और निवेश बढ़ाने की रणनीति के तहत भारत-ब्रिटेन संयुक्त आर्थिक व्यापार समिति का गठन 13 जनवरी, 2005 को किया गया था।

दो भारतीय पक्षियों गोडावण (Great Indian Bustard) और खरमोर (Lesser Florican) के विलुप्तप्राय: होने पर गंभीर चिंता जताते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने इन प्रजातियों के संरक्षण के लिये आपातकालीन प्रतिक्रिया योजना बनाने तथा उसे लागू करने के लिये उच्च अधिकार प्राप्त तीन सदस्यीय समिति गठित की है। इस समिति में ‘बाम्बे नैचुरल हिस्ट्री सोसायटी’ के निदेशक, इस सोसायटी के पूर्व निदेशक डॉक्टर असद आर. रहमानी और उत्तराखंड के मुख्य वन संरक्षक डॉक्टर धनंजय मोहन शामिल हैं। न्यायालय ने केंद्र और उन राज्यों की सरकारों से जवाब मांगा, जहाँ इन दो प्रजातियों के पक्षी सामान्य रूप से पाए जाते हैं।

इन प्रजातियों के संरक्षण के लिये यह आदेश वन्यजीव कार्यकर्त्ताओं की याचिका पर दिया गया जिसमें कहा गया था कि मानसून सत्र में इन प्रजातियों के पक्षियों के तत्काल संरक्षण के लिये आपातकालीन प्रतिक्रिया योजना तैयार करने हेतु निर्देश जारी करने की आवश्यकता है। बड़े आकार का गोंडावण पक्षी राजस्थान का राजकीय पक्षी है तथा IUCN की संकटग्रस्त प्रजातियों की रेड लिस्ट में इसे ‘गंभीर रूप से संकटग्रस्त’ श्रेणी में तथा भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-1 में रखा गया है। दूसरी तरफ खरमोर पक्षी मुख्यतः उत्तर-पश्चिमी महाराष्ट्र तथा मध्य प्रदेश में पाया जाता है और कभी-कभी राजस्थान और गुजरात में भी देखने को मिल जाता है। दुनिया की संकटग्रस्त प्रजातियों में शामिल खरमोर को केंद्रीय वन व पर्यावरण मंत्रालय ने भी ‘संकटापन्न’ घोषित किया है।

एम्स दिल्ली तथा IIT दिल्ली ने मिलकर कृत्रिम त्वचा का विकास किया है। यह देश की महत्त्वपूर्ण चिकित्सकीय शोध परियोजनाओं में शामिल है। कई प्रकार के केमिकल्स व फाइबर का इस्तेमाल कर इसे तैयार किया गया है।

इसके लिये एम्स में ‘त्वचा बैंक’ बनाया जाएगा, जहाँ कृत्रिम त्वचा बहुत ही कम कीमत पर उपलब्ध होगी, जो प्रत्यारोपण के बाद असली त्वचा की तरह काम करेगी। फिलहाल उत्तर भारत में केवल दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में ही ‘त्वचा बैंक’ है, लेकिन वहाँ भी इसकी उपलब्धता बहुत कम रहती है। प्लास्टिक सर्जरी, जलने, कैंसर व दुर्घटनाओं के मामलों में त्वचा की आवश्यकता पड़ती है। फिलहाल यह परीक्षण के दौर में है तथा जानवरों पर इसका ट्रायल चल रहा है। इसके बाद क्लीनिकल परीक्षण के लिये ड्रग कंट्रोलर से स्वीकृति ली जाएगी।

देश के सर्वोच्च न्यायालय की अतिरिक्त प्रशासनिक इमारत का उद्घाटन 17 जुलाई को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने किया। इस इमारत की विशेषता यह ही कि इसमें ईंटों का इस्तेमाल नहीं किया गया है, बल्कि इनके स्थान पर टूटे हुए मलबे से बने 20 लाख ब्लॉक्स इस्तेमाल किये गए, जिससे 35 हजार मीट्रिक टन मिट्‌टी की बचत हुई। इस इमारत की नींव 27 सितंबर, 2012 को रखी गई थी और इसमें पाँच ब्लॉक हैं। इसमें जजों और वकीलों के लिये देश की सबसे बड़ी लाइब्रेरी बनाई गई है तथा मुकदमों की फाइलिंग, कोर्ट के आदेशों की कॉपियाँ लेने आदि सभी काम इस नई बिल्डिंग में होंगे।

पूर्णतः हरित इस इमारत में बड़े-बड़े सोलर पैनल लगे हैं, जिनसे 1400 किलोवॉट सौर ऊर्जा का उत्पादन होगा। इस इमारत में 825 CCTV कैमरे भी लगाए गए हैं तथा अत्याधुनिक LED लाइटों का प्रयोग किया गया है, जो सेंसर प्रणाली पर काम करती हैं। अंधेरा होने पर ये अपने आप चालू हो जाएंगी और किसी के न रहने पर बंद भी हो जाएंगी।

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